Modi Mandir

मोदी मंदिर: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पटना में प्रस्तावित मोदी मंदिर के बारे में आम सवालों के जवाब। English version: FAQs.

मोदी मंदिर का प्रस्ताव

क्या प्रस्ताव आया, किसने रखा और क्यों

मोदी मंदिर क्या है?

मोदी मंदिर बिहार के पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर बनाने का एक प्रस्ताव है। 29 जुलाई 2026 को बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड (ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड) ने अपनी पहली बैठक में इसे मंज़ूरी दी। सभी सदस्यों के समर्थन की बात राजन सिंह की ओर से आई है; बैठक का कार्यवृत्त हमने नहीं देखा। अभी यह सिर्फ़ प्रस्ताव है, कुछ बना नहीं है।

मोदी मंदिर का प्रस्ताव किसने रखा?

पटना में बोर्ड की बैठक में सदस्य राजन सिंह ने यह प्रस्ताव रखा। कुछ खबरों में उनका नाम रंजन सिंह लिखा है। सभी सदस्यों के समर्थन की बात उन्हीं की ओर से आई है; बैठक का कार्यवृत्त हमने नहीं देखा। The Week ने उन्हें बोर्ड का उपाध्यक्ष बताया है, यानी अलग-अलग जगह उनका पद अलग लिखा गया है।

मोदी मंदिर का प्रस्ताव कब पास हुआ?

प्रस्ताव बुधवार, 29 जुलाई 2026 को बोर्ड की पहली बैठक में पास हुआ। बैठक पटना के पुराने सचिवालय में समाज कल्याण विभाग में हुई। बोर्ड खुद अगस्त 2025 में बनाया गया था।

बोर्ड ने मोदी जी के लिए मंदिर का प्रस्ताव क्यों रखा?

राजन सिंह ने कहा कि बिहार में किन्नर समाज का अपना कोई मंदिर नहीं है और वे मोदी जी को धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने उनके शब्दों में "हमें सम्मान और अधिकार दिए"। उन्होंने इसे 2019 के ट्रांसजेंडर कानून से जोड़ा। सब लोग इससे सहमत नहीं हैं। जैसे The Wire ने सवाल उठाया कि समुदाय की दूसरी समस्याएँ बाकी हैं, तो मंदिर पहले क्यों।

बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड क्या है?

यह बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत काम करने वाला बोर्ड है। राज्य सरकार ने इसे अगस्त 2025 में किन्नर और ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकार और कल्याण के लिए बनाया। Drishti IAS के अनुसार इसमें 28 सदस्य हैं।

क्या बोर्ड की मंज़ूरी का मतलब है कि मंदिर बन जाएगा?

नहीं। बोर्ड ने एक विचार को मंज़ूरी दी है। मंदिर के लिए ज़मीन, पैसा और सरकारी अनुमति अभी चाहिए। हमारी पढ़ी खबरों में इसे अभी राज्य सरकार से मंज़ूर नहीं बताया गया है।

क्या यह वेबसाइट मोदी मंदिर की आधिकारिक साइट है?

नहीं। यह एक स्वतंत्र जानकारी देने वाली साइट है। इसका बोर्ड, बिहार सरकार, केंद्र सरकार या किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। हम खबरें समझाते हैं और अपने स्रोत बताते हैं।

कहाँ, कब और कितना खर्च

जगह, तारीख़, लागत और पैसा कौन देगा

मोदी मंदिर कहाँ बनेगा?

प्रस्ताव में जगह पटना बताई गई है। किसी भी खबर में अभी कोई पक्की जगह नहीं बताई गई है। राजन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार पहले ज़मीन तय करेगी।

क्या मैं पटना में मोदी मंदिर देखने जा सकता हूँ?

नहीं। मंदिर अभी बना ही नहीं है, इसलिए देखने के लिए कुछ नहीं है। पटना में असली मंदिर और ऐतिहासिक जगहें देखनी हों तो नीचे "पटना में घूमने की जगहें" वाला सवाल देखें।

क्या मोदी मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है?

नहीं। हमें ज़मीन मिलने, बनाने वाले के चुने जाने या काम शुरू होने की कोई खबर नहीं मिली। कुछ बदलेगा तो हम इस पेज पर जोड़ेंगे।

मोदी मंदिर कब बनेगा?

अभी कोई तारीख़ घोषित नहीं हुई है। हमारी पढ़ी किसी खबर में काम शुरू होने या पूरा होने का समय नहीं दिया गया है। जब तक ज़मीन और पैसा तय नहीं होता, ऑनलाइन दिखने वाली कोई भी तारीख़ अंदाज़ा ही है।

मोदी मंदिर बनाने में कितना खर्च आएगा?

कोई सरकारी बजट नहीं है। खबरों में 112 करोड़ रुपये का आँकड़ा आया है। The Week के अनुसार आयोजक इतनी लागत का मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं, और Drishti IAS ने भी इसे अनुमान बताया है। हमें इस आँकड़े का कोई सरकारी दस्तावेज़ नहीं मिला, इसलिए इसे प्रस्ताव रखने वालों का दावा मानें।

क्या मोदी मंदिर में सरकारी पैसा लगेगा?

राजन सिंह ने कहा कि निर्माण का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। हमें बिहार सरकार का ऐसा कोई बयान या बजट आदेश नहीं मिला जो इसे मंज़ूर करता हो। इसलिए पैसा कौन देगा, यह अभी पक्का नहीं है।

मोदी मंदिर कौन बना रहा है?

अभी कोई नहीं बना रहा। हमारी पढ़ी खबरों में न किसी ट्रस्ट का नाम है, न किसी ठेकेदार या आर्किटेक्ट का। इस साइट के पुराने पन्नों पर लिखा था कि निजी ट्रस्ट पैसा देगा। हमें इसका स्रोत नहीं मिला, इसलिए हमने वह बात हटा दी।

बिहार सरकार ने मोदी मंदिर पर क्या कहा है?

हमने जो खबरें खोलकर पढ़ीं, उनमें बिहार सरकार, केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय का कोई बयान नहीं है। अगर कोई सरकारी बयान आता है तो हम यहाँ जोड़ेंगे।

क्या मंदिर में सोने की मूर्ति होगी?

Drishti IAS के एक नोट में लिखा है कि प्रस्ताव में मोदी जी की आदमकद सोने की मूर्ति की बात है। दूसरी खबरों में इसका ज़िक्र नहीं है और कोई डिज़ाइन जारी नहीं हुआ है। इसलिए यह बात पक्की नहीं है।

क्या मोदी मंदिर की कोई असली फ़ोटो है?

नहीं। मंदिर बना ही नहीं है, इसलिए पटना के तैयार मोदी मंदिर की कोई फ़ोटो असली नहीं हो सकती। कोई आधिकारिक डिज़ाइन या नक्शा भी जारी नहीं हुआ है। अगर कोई तस्वीर ऑनलाइन इसे दिखाने का दावा करे, तो शेयर करने से पहले पूछें कि वह कहाँ से आई।

प्रतिक्रियाएँ और दूसरे मंदिर

मोदी जी का बयान, दिल्ली का कार्यक्रम, राजकोट और मोदीनगर

क्या नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर पर कुछ कहा है?

हमें पटना के प्रस्ताव पर मोदी जी का कोई बयान नहीं मिला। फ़रवरी 2015 में राजकोट के पास समर्थकों ने उनका मंदिर बनाया था, तब उन्होंने हैरानी और दुख जताया था, और वह ढाँचा हटा दिया गया। वह अलग मामला था। इस प्रस्ताव पर उनकी राय हमें नहीं पता।

20 अगस्त 2026 को दिल्ली के प्रेस क्लब में क्या हुआ?

The Week के अनुसार बोर्ड के लोगों ने दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में मोदी जी के आदमकद कटआउट के सामने "मोदी चालीसा" और आरती का कार्यक्रम किया। प्रेस क्लब ने कहा कि कार्यक्रम उसने नहीं कराया था। हॉल प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए बुक हुआ था, बुकिंग की शर्तें तोड़ी गईं, इसलिए कार्यक्रम रुकवा दिया गया। राजन सिंह ने कार्यक्रम का बचाव किया और पूछा कि मोदी जी के लिए मंदिर बनाने में क्या गलत है?

क्या भारत में नरेंद्र मोदी का कोई और मंदिर है?

2015 में गुजरात के राजकोट के पास कोठारिया गाँव में समर्थकों ने मोदी जी की प्रतिमा वाला छोटा मंदिर बनाया था। मोदी जी ने नाराज़गी जताई तो आयोजकों ने योजना छोड़ दी और ढाँचा हटा दिया गया। हमें आज चालू कोई मंदिर नहीं मिला।

राजकोट का मोदी मंदिर क्यों हटाया गया?

खबरों में कारण अलग-अलग लिखे हैं। Al Jazeera के अनुसार अधिकारियों ने इसे सरकारी ज़मीन पर होने के कारण गिराया। The Tribune के अनुसार राजस्व अधिकारियों ने इसे अवैध कहा क्योंकि कोई अनुमति नहीं ली गई थी, और मोदी जी के समर्थकों ने इसे गिराया। दोनों के अनुसार मोदी जी ने इसके खिलाफ़ बात कही थी।

क्या मोदीनगर (गाज़ियाबाद) का मोदी मंदिर यही मंदिर है?

नहीं। उत्तर प्रदेश का मोदीनगर 1945 में उद्योगपति गुजरमल मोदी के नाम पर रखा गया, प्रधानमंत्री के नाम पर नहीं। वहाँ के किसी मंदिर का पटना के प्रस्ताव से संबंध हमें नहीं मिला। वहाँ दर्शन का समय हम पक्का नहीं कर पाए, इसलिए मंदिर से ही पूछ लें।

कानून और संविधान

अनुच्छेद 27, ट्रांसजेंडर कानून और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले

संविधान का अनुच्छेद 27 क्या कहता है?

अनुच्छेद 27 कहता है कि किसी को ऐसा टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसका पैसा किसी खास धर्म के प्रचार या रखरखाव में लगाने के लिए अलग रखा गया हो। यह उन टैक्सों की बात करता है जो खास इसी काम के लिए जमा हों। सामान्य सरकारी पैसे से बने मंदिर पर यह कैसे लागू होता है, इस पर लोगों की राय अलग-अलग है।

क्या सरकार कानूनी तौर पर मंदिर के लिए पैसा दे सकती है?

इसका सीधा हाँ या ना में जवाब नहीं है। अनुच्छेद 27 धर्म के लिए अलग रखे गए टैक्स की बात करता है, और अदालतें हर मामले को उसके तथ्यों पर देखती हैं। पटना के प्रस्ताव पर किसी अदालत ने फ़ैसला नहीं दिया है, और सरकारी पैसे की पुष्टि भी नहीं हुई है।

बोम्मई मामला क्या है और इसका ज़िक्र क्यों होता है?

एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की पीठ ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढाँचे का हिस्सा है। यह मामला राज्य सरकारों को हटाने का था, मंदिरों का नहीं। लोग इसका नाम तब लेते हैं जब बात होती है कि सरकार को सभी धर्मों से बराबर दूरी रखनी चाहिए।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) कानून 2019 क्या है?

यह केंद्र का कानून है जो स्कूल, नौकरी और स्वास्थ्य सेवा जैसी जगहों पर ट्रांसजेंडर लोगों के साथ भेदभाव को रोकता है। पहचान प्रमाण पत्र के लिए व्यक्ति ज़िला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकता है। यह कानून 10 जनवरी 2020 से लागू हुआ। The Week के अनुसार इसके एक संशोधन की आलोचना हुई है, लेकिन उसका ब्योरा हमने नहीं जाँचा।

NALSA मामले (2014) में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को अपना लिंग खुद पहचानने का अधिकार है, जिसमें "तीसरा लिंग" भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को ट्रांसजेंडर लोगों के लिए बराबरी के कदम उठाने होंगे।

पटना में घूमने की जगहें

पटना और बिहार के असली मंदिर और विरासत स्थल

पटना में कौन से मंदिर और ऐतिहासिक जगहें देखी जा सकती हैं?

जानी-मानी जगहों में पटना जंक्शन के पास महावीर मंदिर, तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब, गोलघर और बिहार संग्रहालय शामिल हैं। जाने से पहले हर जगह का खुलने का समय खुद पूछ लें, क्योंकि हमने मौजूदा समय पक्का नहीं किया है।

बिहार का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?

बहुत से लोग बोधगया के महाबोधि मंदिर का नाम लेंगे। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर है और इसका संबंध भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्त करने से है। बिहार में और भी कई प्रसिद्ध जगहें हैं, इसलिए जवाब इस पर निर्भर करता है कि आप किस परंपरा की बात कर रहे हैं।